Category Archives: Stories

Post # 32

एक ख़ास शाम

आज ‘भूमिका’ एक दशक बाद पेंटिंग करने बैठी थी | ऑइल पेंटिंग – जो किसी ज़माने में उस की मनपसंद हुआ करती थी | और उस की एक-एक पेंटिंग पर परिजनों और सखी-सहेलियों की दर्जनों वाहवाही मिला करती थीं | उन चंद तारीफों में आज की सैंकड़ों-हज़ारों सोशल मीडिया लाइक्स से कहीं ज़्यादा अपनापन और आनंद था | बाद में ज़िंदगी की भाग दौड़ में वो यह कला जैसे भुला ही बैठी थी | आज उस के हाथ जैसे पेंटिंग बनाने को चलते ही नहीं बन रहे थे | कोई अच्छा आईडिया भी आ के नहीं दे रहा था | वह अचरज में थी |

‘बीप बीप्’ पास ही रखे उस के स्मार्टफोन में एसएमएस आया था जिस में पतिदेव ‘अहम्’ कह रहे थे ‘आज शाम का वादा याद है न?’ भूमिका मंद-मंद मुस्कुरा दी |’बीप बीप’ एक और एसएमएस आया था ‘मैं रास्ते में ही हूँ | पहुंचने में दस मिनट से ज़्यादा नहीं लगेंगे |’

भूमिका उठ कर किचन में गई और फटाफट दो कप चाय बना ली | इतने में डोरबेल बज गई | पीपहोल से झाँक कर देखा तो सामने अहम् को ही पाया |

‘मुझे वादा बिलकुल याद है !’ भूमिका दरवाज़ा खोलते ही चहक कर बोली |

‘अच्छा, तो दिखाओ अपना फ़ोन, करो स्विच ऑफ और रखो लाकर में !’ प्रत्युत्तर में अहम् भी चहका |

‘आप भी अपना फ़ोन निकालें जनाब |’ भूमिका ने फ़रमाया |

‘क्या तुम भी’ कह कर हँसते हुए अहम् ने भी अपना फ़ोन सामने कर दिया |

दोनों ने अपना-अपना फ़ोन स्विच ऑफ किया और दोनों फ़ोन लॉकर में रख दिए गए | फिर दोनों बालकनी में पहुंच गए जहां चाय इंतज़ार कर रही थी | ऐसा ही तय हुआ था, यही उन का एक-दूसरे से वादा  था | दोनों एक-एक कुर्सी ले कर बैठ गए | आज अरसे बाद दोनों एक दूसरे के साथ को आत्मिक तौर पर महसूस कर पा रहे थे | बिलकुल वैसे जैसी उम्मीद की थी | आज कोई बीप-बीप, कोई रिंगटोन उन की बातों में खलल नहीं डाल रहे थे | आज वो दोनों फ़ोन की स्क्रीन में नहीं, एक-दूसरे में खोये थे | यह सुकून शादी के चार साल में पहली बार था | इतनी देर में बारिश शुरू हो गई | दोनों थोड़ा भीगे और अंदर आ गए | अहम् फ्रेश हो कर रिलैक्स करने चला गया | और भूमिका ? वह वापस अपनी पेंटिंग की ओर | अब उस के दिमाग में आईडिया भी था और हाथ भी पेंटिंग करने को चल पड़े थे | वह एक बार फिर से एक लाजवाब ऑइल पेंटिंग तैयार कर के खूब सारी वाहवाही बटोरने को उत्सुक थी | एक ख़ास शाम ने उस की सोई रचनात्मकता जगाने में ‘अहम् भूमिका’ निभाई थी |

Post # 31

गठरी

आज मैं आप लोगों को एक कहानी सुनाती हूं । पर उस से पहले एक disclaimer :

ये जो world है ना world.. इस में 2 तरह के लोग होते हैं । एक, वो जो शिकारी की तरह होते हैं, दूसरों को दुख दे कर खुद मस्तमौला बने रहते हैं । और दूसरे वो जो शिकार की तरह होते हैं, हर पल हर समय किसी समस्या से जूझ रहे होते हैं । अगर आप को पहले वर्ग के बारे में पढ़ते हुए अपना विचार आया तो आप अपनी मस्ती जारी रखें । यहां कही गई बातें आप के लिए व्यर्थ हैं। पर अगर कहीं आप अपना नाता दूसरे वर्ग से रखते हैं, आप को लगता है कि संसार में आप से ज़्यादा समस्या किसी के साथ नहीं तो ये कहानी आप के लिए है । उम्मीद है कि अगली बार निराशा की घड़ी में इस कहानी का स्मरण आप को हिम्मत देगा । तो कहानी कुछ इस तरह है :

एक समय किसी गांव में एक आदमी बहुत परेशान था । उस के सिर पर कर्ज़ा बहुत हो गया था, दोस्त कम हो गए थे और रिश्तेदार सब रूठ गए थे । इन वजहों से उस के परिवार में बहुत तनाव भी रहने लगा था । फिर भी वो किसी तरह गुज़र-बसर कर रहा था । एक दिन आखिरकार वो अपनी परेशानियों से हार मान कर अपने जीवन का अंत करने का मन बना ही रहा था कि एक भले मानस ने उसे भगवान की तपस्या में लीन होने का सुझाव दिया । उस के लिए ये बहुत ही कठिन था, फिर भी उसे आत्महत्या से आसान ही लगा । उस ने एक लंबे अरसे तक भगवान की कड़ी तपस्या करी । आखिरकार एक दिन भगवान उस के सामने प्रकट हुए । उस दिन उसे पहली बार सफलता का एहसास हुआ । पर पूरी तरह खुश वो अब भी नहीं था । उस के मन में उलझन जस-की-तस थी । भगवान प्रकट हुए तो उस ने उन्हें प्रणाम किया । जब भगवान ने उस से पूछा कि उसे क्या चाहिए तो वो बोला कि उसे ज़रूरत तो कई चीज़ों की है, पर फिलहाल उसे बस एक प्रश्न का उत्तर चाहिए । और प्रश्न ये कि उस के जीवन में इतनी समस्याएं क्यों हैं, दूसरों को तो इतनी समस्या नहीं । भगवान बोले कि उसे अपने प्रश्न का उत्तर मिल जाएगा, बस उसे एक छोटा-सा काम करना होगा । काम ये कि उसे अपनी सारी समस्यायों को एक गठरी में बांध कर उन के बताए पते पर रख कर आना होगा । वो ये करने को तैयार हो गया । भगवान अंतर्ध्यान हो गए । उस ने देर किए बिना सब से पहले अपनी सारी समस्याओं को एक गठरी में बांधा और चल पड़ा उस पते की ओर । पूरे रास्ते सोचता रहा ‘बस मुझे इस प्रश्न का उत्तर मिल जाए कि मैं ही क्यों, बाकी देखूंगा’ । पते पर पहुंच कर उसने प्रवेश किया ही था कि सामने का नज़ारा देख कर सन्न रह गया । वहां उसकी गठरी जैसी अनेकों गठरियां थी । और आश्चर्य की बात ये थी कि उस की गठरी सब से छोटी थी । उसे समझ आ गया कि भगवान का संकेत किस ओर था । आप को समझ आया?
भगवान उस से ये कहना चाह रहे थे कि परेशानियां सभी के हिस्से में हैं । पर हर किसी को लगता है कि हमारे जीवन में ही सब से ज़्यादा उलझन है । हमें ये विचार मन से निकाल देना चाहिए और हिम्मत से काम लेते हुए – दूसरों से तुलना किए बिना – अपनी समस्याओं के हल खोजने चाहिए । आखिर, भगवान का काम है रास्ता दिखाना, हमें उस पर चलना है, अपना ध्येय पूरा करने के लिए ।
कल्पना कीजिए कि कभी आप को और आप के अपनों को एक टेबल के इर्द-गिर्द बैठाया जाए और कहा जाए कि अपनी-अपनी समस्याएं कागज़ पर लिख कर एक-दूसरे से लेन-देन करने से आप अपनी समस्याओं का भी लेन-देन कर सकते हैं, तो क्या आप किसी और की समस्याएं अपने जीवन में लेना चाहेंगे? नहीं ना? इसलिए हमें अपने-अपने जीवन से संतुष्ट होना चाहिए । जैसा भी है, और बहुत लोगों से कहीं बेहतर है । पर हम सब परेशानी के समय इस तरह की बातें भूल जाते हैं । फिर भी, उम्मीद है कि कभी-ना-कभी किसी-ना-किसी को ये कहानी बुरे समय में हिम्मत देगी ।

आज के लिए इतना ही 🙏 । अनुमति दें ।
।। सर्वे भवन्तु सुखिनः ।।