Post # 10

क्या लिखूं ?

हजारों कौंधते ख़याल ज़ेहन में,

सोच रही थी आज लिखूं..

अरसे बाद ये दिल में आया,

छोड़ के सारे कामकाज लिखूं |

पर लिखने बैठी तो उलझ गयी कि

अपने दिल के राज़ लिखूं,

या राजनीति की चहल-पहल में

क्या चल रहा आज लिखूं?

कौन से खेल में आज देश को,

फिर हुआ युवाओं पर नाज़ लिखूं,

या..फिर एक नेता को ले कर

किसी घोटाले का हुआ पर्दाफाश लिखूं?

विज्ञान में आई कोई नई क्रांति,

खेती के लिए नई खाद लिखूं,

या..युवा पीढ़ी में छा रहे

फिर किसी नए पेय का स्वाद लिखूं?

कितनी हत्याएं, दुर्घटनाएं,

कितने रेप हुए आज लिखूं,

या..फिर किसी व्यापारी की एक पहल से

हिल गए तख़्त-ओ-ताज लिखूं?

इसी सोच में डूबी थी कि

पल-दो पल को आँख लग गयी |

आँख खुली तो चादर तान ली,

सोचा कुछ दिन बाद लिखूं |

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